2012 की विक्की डोनर में स्पर्म डोनेशन, 2017 की शुभ मंगल सावधान में गुप्त रोग की बात, 2018 की अंधाधुन में अंधे और उसी साल बधाई हो से बधाइयाँ बटोरने वाले आयुष्मान खुराना ने 2019 में आर्टिकल 15, ड्रीम गर्ल और बाला जैसी फ़िल्मों के साथ कमाल कर दिया.
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अब 2020 की धमाकेदार शुरुआत करने की उन्होंने ठान ली है. आयुष्मान खुराना की इस साल की पहली फ़िल्म 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान' का ट्रेलर बहार आ गया है. ट्रेलर के रिलीज़ होते ही, ये बात तय हो गई है कि आयुष्मान एक बार फिर दर्शकों को हंसाने के लिए तैयार हैं.
21 फ़रवरी 2020 के दिन बड़े पर्दे पर आएगी 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान''.
ट्रेलर की शुरुआत में आयुष्मान के किरदार से पूछा जाता है कि कब डिसाइड किया ''ये'' बनोगे. इसके बाद आयुष्मान खुराना कहते हैं, 'ये नहीं, गे.'
पहले सीन से ट्रेलर और फ़िल्म की कहानी समझ में आ जाती है. 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान' ऐसे रूढ़िवादी परिवार की कहानी है जो इस बात को बहुत मुश्किल से स्वीकार करेगा कि उनका बेटा समलैंगिक हैं.
फ़िल्म क्रिटिक अर्नब बनर्जी से हमने जानना चाहा कि आयुष्मान खुराना ऐसी कहानियाँ क्यों चुनते हैं?
तो उनका कहना था, ''हर एक्टर अपने शुरुआती दौर में रिस्क लेना नहीं चाहता. हर कलाकार के लिए शुरुआती 2-3 फ़िल्में चुनना एक जुए की तरह होता है. आयुष्मान खुराना की पहली फ़िल्म 'विक्की डोनर' ने उनके लिए कमाल कर दिया. उसके बाद शुभ मंगल सावधान ने उनकी छवि बदल के रख दी.''
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कॉमेडी के तड़के के साथ गंभीर विषयों पर फ़िल्में चुनने में महारत हासिल कर चुके आयुष्मान को क्या ऐसी कहानियाँ ख़ुद मिल जाती हैं?
अर्नब बनर्जी बताते हैं, ''फ़िल्म डायरेक्टर्स भी जान जाते हैं कि कौन सी फ़िल्म किस कलाकार के साथ सही रहेगी, बड़े प्रोडक्शन हाउसेस, बॉलीवुड के ख़ान, इनके अलावा सब ऑडिशन देते हैं, तभी पता लगता है कि कौन कितने पानी में है.''
वैसे तो बॉलीवुड में सिर्फ़ आयुष्मान ही नहीं उनसे पहले भी कई कलाकारों ने गे का किरदार निभाया है.
2016 की फ़िल्म 'अलीगढ़' में मनोज बाजपेयी, 2012 की फ़िल्म 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर' में ऋषि कपूर, 2016 की फ़िल्म 'कपूर एंड संस' में फ़व्वाद ख़ान भी ऐसी भूमिका निभा चुके हैं.
अगले महीने की रिलीज़ 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान' को अभी से लोगों ने सुपर हिट क़रार कर दिया है.
इस फ़िल्म में आयुष्मान खुराना के साथ फ़िल्म 'बधाई हो' वाले माँ बाप नज़र आएंगे यानी नीना गुप्ता और गजराज राव. इस फ़िल्म का निर्देशन हितेश केवल ने किया है.
Wednesday, January 22, 2020
Thursday, January 9, 2020
ईरान के हमले के बाद कच्चे तेल की क़ीमत में उछाल
इराक़ में अमरीकी सैन्य ठिकाने पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में उछाल आई है.
एशियन बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में 2.5 प्रतिशत की उछाल आई है और अब ये 69.94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गई है.
ये उछाल इस चिंता में है कि कहीं मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई रुक न जाए.
इस ख़बर के बाद सोने की क़ीमतों में भी उछाल आई है.
लेकिन ईरान के हमले से अंतरराष्ट्रीय शेयर बाज़ारों में नकारात्मक असर देखने को मिला है.
जापान का निकेई दो प्रतिशत गिर गया है, जबकि हॉन्गकॉन्ग के हेंग शेंग में एक प्रतिशत की गिरावट आई है.
ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने कहा है कि ये हमला उनके टॉप कमांडर क़ासिम सुलेमानी की मौत का बदला है.
ईरान ने ये हमला क़ासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के बाद किया. शुक्रवार को अमरीका ने ड्रोन हमला करके क़ासिम सुलेमानी को मार दिया था.
सुलेमानी की मौत के बाद से ही ये माना जा रहा था कि अमरीका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ेगा.
ये भी माना जा रहा है कि हॉरमुज़ से होकर दुनियाभर में होने वाली तेल की सप्लाई रुक सकती है.
सऊदी अरब, इराक़, संयुक्त अरब अमीरात और क़ुवैत से तेल का निर्यात इसी रास्ते से होता है. ईरान भी ज़्यादातर तेल का निर्यात इसी रास्ते से करता है.
ताज़ा हमलों के बाद अमरीकी एविएशन रेगुलेटर फ़ेडेरल एविएशन ऑथॉरिटी (एफ़एए) ने अमरीकी यात्री विमानों को इराक़ की हवाई सीमा से उड़ने के लिए मना कर दिया है.
सिंगापुर एयरलाइंस ने भी अपने सभी विमानों को ईरानी हवाई सीमा से न ग़ुजरने को कहा है.
पिछले दिनों बीबीसी के साथ बातचीत में एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने इस स्थिति का विश्लेषण किया था. आप भी पढ़िए.
भारत अमरीका और रूस से भी तेल मंगाता है. लेकिन भारत सबसे ज़्यादा तेल मध्य पूर्व के देशों से मंगाता है और इनमें इराक़ का नंबर सबसे पहला है. इसके अलावा सऊदी अरब, ओमान और क़ुवैत भी है.
भारत को इसकी चिंता नहीं है कि तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आएगी. भारत की चिंता तेल की क़ीमतों को लेकर है. अभी तेल की क़ीमत प्रति बैरल तीन डॉलर बढ़ गई है.
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रति बैरल तीन डॉलर की क़ीमत बढ़ जाना बहुत बड़ी बात होती है. भारत में जो आम उपभोक्ता है, जो पेट्रोल-डीज़ल ख़रीदता है या एलपीजी ख़रीदता है या कंपनियाँ जो इन पर निर्भर हैं, उनके लिए ये अच्छी ख़बर नहीं है.
अमरीका की इस कार्रवाई का भारत के लोगों की जेब पर असर पड़ने वाला है क्योंकि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल और एलपीजी की क़ीमतें बढ़ना तय है. भारत को तेल की आपूर्ति तो होगी, लेकिन क़ीमतें बढ़ेंगी.
सरकार के लिए भी ये चिंता की बात है, क्योंकि तेल की क़ीमतें ऐसी समय में बढ़ रही हैं, जब सरकार के सामने वित्तीय घाटे की चुनौती बनी हुई है. रुपए पर भी दबाव बढ़ेगा. रुपए के लिए अच्छी ख़बर नहीं है.
आने वाले सप्ताह में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यह चिंता की बात है. ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता की बात है.
अमरीका ने ये कार्रवाई की तो इराक़ में है ईरान के ख़िलाफ़, लेकिन इसका सबसे प्रतिकूल असर भारत पर पड़ने वाला है.
एशियन बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में 2.5 प्रतिशत की उछाल आई है और अब ये 69.94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गई है.
ये उछाल इस चिंता में है कि कहीं मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई रुक न जाए.
इस ख़बर के बाद सोने की क़ीमतों में भी उछाल आई है.
लेकिन ईरान के हमले से अंतरराष्ट्रीय शेयर बाज़ारों में नकारात्मक असर देखने को मिला है.
जापान का निकेई दो प्रतिशत गिर गया है, जबकि हॉन्गकॉन्ग के हेंग शेंग में एक प्रतिशत की गिरावट आई है.
ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने कहा है कि ये हमला उनके टॉप कमांडर क़ासिम सुलेमानी की मौत का बदला है.
ईरान ने ये हमला क़ासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के बाद किया. शुक्रवार को अमरीका ने ड्रोन हमला करके क़ासिम सुलेमानी को मार दिया था.
सुलेमानी की मौत के बाद से ही ये माना जा रहा था कि अमरीका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ेगा.
ये भी माना जा रहा है कि हॉरमुज़ से होकर दुनियाभर में होने वाली तेल की सप्लाई रुक सकती है.
सऊदी अरब, इराक़, संयुक्त अरब अमीरात और क़ुवैत से तेल का निर्यात इसी रास्ते से होता है. ईरान भी ज़्यादातर तेल का निर्यात इसी रास्ते से करता है.
ताज़ा हमलों के बाद अमरीकी एविएशन रेगुलेटर फ़ेडेरल एविएशन ऑथॉरिटी (एफ़एए) ने अमरीकी यात्री विमानों को इराक़ की हवाई सीमा से उड़ने के लिए मना कर दिया है.
सिंगापुर एयरलाइंस ने भी अपने सभी विमानों को ईरानी हवाई सीमा से न ग़ुजरने को कहा है.
पिछले दिनों बीबीसी के साथ बातचीत में एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने इस स्थिति का विश्लेषण किया था. आप भी पढ़िए.
भारत अमरीका और रूस से भी तेल मंगाता है. लेकिन भारत सबसे ज़्यादा तेल मध्य पूर्व के देशों से मंगाता है और इनमें इराक़ का नंबर सबसे पहला है. इसके अलावा सऊदी अरब, ओमान और क़ुवैत भी है.
भारत को इसकी चिंता नहीं है कि तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आएगी. भारत की चिंता तेल की क़ीमतों को लेकर है. अभी तेल की क़ीमत प्रति बैरल तीन डॉलर बढ़ गई है.
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रति बैरल तीन डॉलर की क़ीमत बढ़ जाना बहुत बड़ी बात होती है. भारत में जो आम उपभोक्ता है, जो पेट्रोल-डीज़ल ख़रीदता है या एलपीजी ख़रीदता है या कंपनियाँ जो इन पर निर्भर हैं, उनके लिए ये अच्छी ख़बर नहीं है.
अमरीका की इस कार्रवाई का भारत के लोगों की जेब पर असर पड़ने वाला है क्योंकि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल और एलपीजी की क़ीमतें बढ़ना तय है. भारत को तेल की आपूर्ति तो होगी, लेकिन क़ीमतें बढ़ेंगी.
सरकार के लिए भी ये चिंता की बात है, क्योंकि तेल की क़ीमतें ऐसी समय में बढ़ रही हैं, जब सरकार के सामने वित्तीय घाटे की चुनौती बनी हुई है. रुपए पर भी दबाव बढ़ेगा. रुपए के लिए अच्छी ख़बर नहीं है.
आने वाले सप्ताह में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यह चिंता की बात है. ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता की बात है.
अमरीका ने ये कार्रवाई की तो इराक़ में है ईरान के ख़िलाफ़, लेकिन इसका सबसे प्रतिकूल असर भारत पर पड़ने वाला है.
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